
खगड़िया: बागमती-कोसी के बढ़ते जलस्तर से प्रशासन अलर्ट… तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी… अलौली-मानसी में अतिरिक्त नावें तैनात…डीएम विक्रम विरकर ने संभाली कमान…
खगड़िया: बागमती-कोसी के बढ़ते जलस्तर से प्रशासन अलर्ट… तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी… अलौली-मानसी में अतिरिक्त नावें तैनात…डीएम विक्रम विरकर ने संभाली कमान…
खगड़िया/कौशी एक्सप्रेस/ बागमती एवं कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सोमवार को जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने प्रेस वार्ता कर जिले में बाढ़ की संभावित स्थिति एवं प्रशासनिक तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। प्रेस वार्ता में उप विकास आयुक्त श्रेया श्री सहित जिला प्रशासन के अन्य संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने बताया कि बागमती एवं कोसी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। वर्तमान में बागमती नदी का जलस्तर 37.40 मीटर है, जो उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से 1.53 मीटर नीचे है। वहीं कोसी नदी का जलस्तर 35.24 मीटर है, जो HFL से 1.16 मीटर नीचे है। पिछले 12 घंटे में बागमती के जलस्तर में 18 सेंटीमीटर तथा कोसी के जलस्तर में 14 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, दोनों नदियों के जलस्तर में वृद्धि की दर में कमी आई है।
जिलाधिकारी ने कहा कि संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा पूर्व तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। सभी संबंधित पदाधिकारियों को क्षेत्र में लगातार भ्रमण कर स्थिति का जायजा लेने तथा बाढ़ संभावित एवं प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ संभावित पंचायतों में हो रही संध्या चौपाल
सभी बाढ़ संभावित पंचायतों में संध्या चौपाल आयोजित कर स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित किया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली जा रही है। तटवर्ती एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों में माइकिंग के माध्यम से लोगों को जागरूक करते हुए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जा रही है।
पशुओं की सुरक्षा एवं राहत व्यवस्था के लिए संबंधित टीमें कैंप मोड में प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर रही हैं। वहीं संभावित प्रभावित क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं, विशेषकर जिनका प्रसव निकट है, से संपर्क स्थापित किया जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित रूप से अस्पताल पहुंचाया जा सके।
छह प्रखंडों में तैयारियों की समीक्षा
28 सितंबर को बागमती एवं कोसी से संभावित रूप से प्रभावित अलौली, बेलदौर, चौथम, गोगरी, मानसी एवं खगड़िया प्रखंडों में जिला एवं प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर वर्तमान स्थिति, आगामी तैयारियों एवं त्वरित प्रतिक्रिया की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। इसके अलावा जिला स्तर पर भी सभी प्रखंड, अनुमंडल एवं जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर बाढ़ की स्थिति एवं प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की गई।
अलौली और मानसी में 3-3 अतिरिक्त नावें
बढ़ते जलस्तर के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन एवं आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नावों का परिचालन किया जा रहा है। खगड़िया प्रखंड के उत्तर मारर पंचायत अंतर्गत रसौंक बांध वार्ड संख्या 09 एवं 10 से तीन गछिया तक तथा रसौंक घाट से सहूरी तक नावों का परिचालन हो रहा है। बेलदौर प्रखंड के कैंजरी पंचायत में कैंजरी पश्चिम पार से पूर्वी पार बांध तथा कदवा वासा से महाजन वासा तक भी नावें चल रही हैं।
28 सितंबर से अलौली एवं मानसी प्रखंड में 3-3 अतिरिक्त नावों का परिचालन शुरू किया गया है।
अलौली में नावों के निर्धारित मार्ग:
मझवारी से मोहरघाट काली स्थान तक।
हथवन से चेराखेड़ा तक।
उत्तरी बहुवारा से दक्षिणी बहुवारा तक।
मानसी में नावों के निर्धारित मार्ग:
हियातपुर घाट से डोहवा घाट तक।
डोमी सदा घर से चलितार सदा घर तक।
चकला मुशहरी घाट से हियातपुर घाट तक।
प्रशासन द्वारा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त नावों का परिचालन भी सुनिश्चित किया जाएगा।
66 सामुदायिक रसोई और 7 राहत शिविर चिह्नित
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अलौली में 28 सामुदायिक रसोई एवं 4 राहत शिविर, चौथम में 18 सामुदायिक रसोई एवं 2 राहत शिविर तथा बेलदौर में 20 सामुदायिक रसोई एवं 1 राहत शिविर के लिए स्थल चिह्नित किए गए हैं। सभी चिह्नित सामुदायिक रसोई केंद्रों एवं राहत शिविरों का भौतिक सत्यापन पूरा कर लिया गया है।
पशुओं की सुरक्षा के लिए अलौली में 8, बेलदौर में 4 तथा चौथम में 5 पशु राहत शिविर भी चिह्नित किए गए हैं।
तटबंधों पर 24 घंटे गश्ती
जिले के सभी तटबंधों पर सतत निगरानी रखी जा रही है। संबंधित अभियंताओं एवं तटबंध रक्षकों द्वारा 24 घंटे गश्ती एवं निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की क्षति अथवा संभावित समस्या का तत्काल पता लगाकर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
जिला नियंत्रण कक्ष द्वारा प्रतिदिन सभी संबंधित मुखिया एवं वार्ड सदस्यों से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर क्षेत्र की स्थिति एवं स्थानीय समस्याओं की जानकारी प्राप्त की जा रही है। अंचल एवं अनुमंडल स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं।
जिला प्रशासन द्वारा कहा गया है कि बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, सतत निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया एवं समन्वित राहत व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। नागरिकों एवं पशुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता तथा प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर आवश्यक सहायता पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
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