
खगड़िया: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे डीएम विक्रम विरकर…राहत-पुनर्वास कार्यों का लिया जायजा…जल निकासी तेज करने, ब्लीचिंग पाउडर छिड़काव व पेयजल जांच के निर्देश…फसल क्षति का पंचायतवार आकलन कर रिपोर्ट देने को कहा
खगड़िया: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे डीएम विक्रम विरकर…राहत-पुनर्वास कार्यों का लिया जायजा…जल निकासी तेज करने, ब्लीचिंग पाउडर छिड़काव व पेयजल जांच के निर्देश…फसल क्षति का पंचायतवार आकलन कर रिपोर्ट देने को कहा…
खगड़िया/कौशी एक्सप्रेस। बाढ़ के बाद उत्पन्न परिस्थितियों का जायजा लेने और राहत एवं पुनर्वास कार्यों को प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने बुधवार को गोगरी एवं परबत्ता प्रखंडों के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान गोगरी के अनुमंडल पदाधिकारी, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता आमजनों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझना, फीडबैक लेना तथा समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है।
जिलाधिकारी सबसे पहले गोगरी प्रखंड की बोरना पंचायत एवं सहनी टोला पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों एवं जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर राहत कार्यों की जानकारी ली तथा वर्तमान जरूरतों के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने इठहरी, कटघरा एवं भुरिया क्षेत्रों का भ्रमण कर जलजमाव और नदियों के जलस्तर की स्थिति का जायजा लिया।
बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों एवं सड़कों का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मरम्मत कार्य में तेजी लाकर आवागमन सुचारू करने का निर्देश दिया। वहीं, जिला कृषि पदाधिकारी को बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का पंचायतवार एवं सटीक आकलन कर शीघ्र रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
इसके बाद जिलाधिकारी ने परबत्ता प्रखंड के बावन कोठी समेत अन्य प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से संवाद किया। बाढ़ का पानी घटने के बाद की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने जल निकासी कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। संभावित संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने तथा चापाकलों एवं अन्य पेयजल स्रोतों की जल गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करने का निर्देश लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग को दिया।
डूबने की घटनाओं की रोकथाम पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने डूबने की घटनाओं से बचाव को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी कई स्थानों पर पानी के नीचे गहरे गड्ढे बन जाते हैं, जो दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां लाल झंडी एवं बैरिकेडिंग लगाने तथा लोगों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने आमजनों से अपील की कि जलजमाव वाले क्षेत्रों एवं गहरे पानी में जाने से बचें, बच्चों को नदी, तालाब एवं गड्ढों के आसपास न जाने दें तथा आवागमन के लिए केवल सुरक्षित नावों का ही उपयोग करें।
मछुआरों से संवाद, मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर चर्चा
इस दौरान जिलाधिकारी ने स्थानीय मछुआरों से भी मुलाकात की। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने तथा मछुआरों की आजीविका को और सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर बनाने को लेकर चर्चा की।
अंत में जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन, सड़क एवं पुल-पुलियों की मरम्मत तथा फसल क्षति के आकलन में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में आमजनों की सुरक्षा, सुविधा एवं आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।
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