खगड़िया: सिविल सर्जन डॉ. रामेन्द्र कुमार सहित IMA एवं IDA पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ…निक्षय मित्रों के सहयोग से गरीब टीबी मरीजों के बीच वितरित की गई पोषण किट…

खगड़िया: सिविल सर्जन डॉ. रामेन्द्र कुमार सहित IMA एवं IDA पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ…निक्षय मित्रों के सहयोग से गरीब टीबी मरीजों के बीच वितरित की गई पोषण किट…

खगड़िया /कौशी एक्सप्रेस/ टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत शनिवार को  जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र कुमार, IMA अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार, IMA सचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार एवं IDA सचिव डॉ. देवव्रत कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर टीबी उन्मूलन को लेकर जागरूकता बढ़ाने, मरीजों को नियमित उपचार से जोड़ने तथा जरूरतमंद मरीजों को पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान निक्षय मित्र के सहयोग से गरीब एवं जरूरतमंद टीबी मरीजों के बीच पोषण किट का वितरण किया गया। पोषण किट मिलने से मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग एवं सामाजिक संस्थाओं की इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को केवल दवा उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उनके बेहतर स्वास्थ्य एवं उपचार की निरंतरता में आवश्यक सहयोग प्रदान करना भी है।

टीबी के इलाज में नियमित दवा के साथ पोषण भी महत्वपूर्ण

कार्यक्रम में चिकित्सकों ने कहा कि टीबी एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है। मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवा का सेवन करना चाहिए और उपचार को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। इसके साथ ही पर्याप्त एवं पौष्टिक भोजन भी मरीज के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चिकित्सकों ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता जरूरी है। संपन्न एवं सक्षम लोग निक्षय मित्र बनकर जरूरतमंद टीबी मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। इससे मरीजों को उपचार के दौरान सामाजिक एवं आर्थिक सहयोग भी प्राप्त होता है।

सिविल सर्जन ने कहा—समय पर जांच और पूरा उपचार जरूरी

सिविल सर्जन डॉ. रामेन्द्र कुमार ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सबसे जरूरी है कि बीमारी की पहचान समय पर हो और मरीज का उपचार पूरा कराया जाए। लंबे समय से खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना अथवा टीबी से संबंधित अन्य लक्षण दिखाई देने पर लोगों को जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि टीबी के संदिग्ध मरीजों की जांच, मरीजों की पहचान और उपचार की सुविधा समय पर उपलब्ध हो। साथ ही समाज के लोगों को भी इस अभियान से जोड़कर जरूरतमंद मरीजों को हरसंभव सहयोग दिया जाए।

IMA अध्यक्ष ने कहा—सामूहिक प्रयास से मिलेगी सफलता

IMA अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों के प्रति समाज में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। मरीजों को उपचार के साथ प्रोत्साहन और सहयोग की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि “निक्षय मित्र” की पहल जरूरतमंद मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सहयोग का माध्यम है। सक्षम लोग आगे आकर टीबी मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराएं और उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ने में सहयोग दें।

IMA सचिव ने कहा—मरीज उपचार बीच में न छोड़ें

IMA सचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार ने कहा कि टीबी से मुक्ति के लिए मरीजों का नियमित उपचार बेहद आवश्यक है। मरीज दवा का सेवन चिकित्सक की सलाह के अनुसार करें और उपचार की अवधि पूरी करें। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान पोषण की कमी मरीज के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए पोषण किट वितरण जैसी पहल उपयोगी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षणों को छिपाने के बजाय समय पर जांच कराएं और बीमारी की पुष्टि होने पर नियमित उपचार लें।

IDA सचिव ने कहा—जागरूकता से टूटेगा बीमारी का डर

IDA सचिव डॉ. देवव्रत कुमार ने कहा कि टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बीमारी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है। सही जानकारी, समय पर जांच, नियमित उपचार और पोषण सहायता के माध्यम से मरीजों को स्वस्थ होने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि पोषण, सहयोग और संवेदना से ही टीबी मुक्त भारत के सपने को साकार किया जा सकता है।

निक्षय मित्र से जुड़ने की अपील

कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने समाज के सक्षम लोगों से अपील की कि वे निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता के लिए आगे आएं। जरूरतमंद मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराने से उनके उपचार के दौरान आर्थिक एवं पोषण संबंधी कठिनाइयों को कम करने में मदद मिल सकती है। वक्ताओं ने कहा कि एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए टीबी मरीजों के साथ खड़ा होना सामूहिक जिम्मेदारी है। “निक्षय मित्र के साथ मिलकर टीबी रोगी को पोषण सहायता दें, स्वस्थ भारत बनाएं” के संदेश के साथ लोगों को इस अभियान में भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. पवन कुमार, डॉ. शैलेंद्र कुमार, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. ऋतुराज, डॉ. गुलशन, डॉ. देवव्रत कुमार, डॉ. के. कनिका, डॉ. अमोद कुमार (CDO), डॉ. विजय कुमार (DLO) सहित अन्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे। इसके अलावा शेखर कुमार, सीनियर टीबी लैब सुपरवाइजर (मुख्यालय), शशि प्रकाश, DPC तथा नंद कुमार राम, STS (मुख्यालय) की भी कार्यक्रम में सहभागिता रही।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने “हमारा संकल्प—टीबी मुक्त भारत” के संकल्प को दोहराते हुए टीबी उन्मूलन के लिए जागरूकता, उपचार और पोषण सहयोग को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। मालूम हो कि कार्यक्रम का आयोजन IMA एवं IDA के सौजन्य से किया गया।

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