विद्यार्थियों में घटती पढ़ाई की रुचि पर कोशी साइंस क्लासेज के डायरेक्टर राजीव कुमार चौहान ने रखे अपने विचार…बोले— बढ़ती मोबाइल लत बन रही सबसे बड़ी बाधा…

विद्यार्थियों में घटती पढ़ाई की रुचि पर कोशी साइंस क्लासेज के डायरेक्टर राजीव कुमार चौहान ने रखे अपने विचार…बोले— बढ़ती मोबाइल लत बन रही सबसे बड़ी बाधा

खगड़िया /कौशी एक्सप्रेस/ वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। तकनीक के विस्तार के साथ जहां सीखने के नए अवसर बढ़े हैं, वहीं विद्यार्थियों की पढ़ाई के प्रति गंभीरता और समर्पण में कमी भी देखने को मिल रही है। इस संबंध में फिजिक्स शिक्षक एवं कोशी साइंस क्लासेज के निदेशक राजीव कुमार चौहान ने अपनी चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने बताया कि पिछले 14 वर्षों से कक्षा 11वीं, 12वीं तथा JEE/NEET की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को पढ़ाने के दौरान उन्होंने यह बदलाव करीब से महसूस किया है। उनके अनुसार वर्ष 2014-15 से पहले विद्यार्थियों में लगन, अनुशासन और ईमानदारी अधिक देखने को मिलती थी, जो अब धीरे-धीरे कम हो रही है।
राजीव कुमार चौहान ने इस वर्ष दसवीं पास करने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से सचेत रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह समय उनके भविष्य की दिशा तय करने का सबसे अहम चरण होता है। यदि इस समय सही मार्गदर्शन और गंभीरता नहीं दिखाई गई, तो आगे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता कठिन हो सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित पढ़ाई, स्वाध्याय (Self-study) को प्राथमिकता देने और लक्ष्य स्पष्ट रखने की अपील की।
मोबाइल का बढ़ता प्रभाव मुख्य कारण :  विद्यार्थियों में गिरती पढ़ाई की रुचि के पीछे सबसे बड़ा कारण मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बताया गया है। उन्होंने कहा कि आज के छात्र पढ़ाई की अपेक्षा सोशल मीडिया और मनोरंजन में अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं। इसके अलावा स्वाध्याय की कमी, अभ्यास का अभाव, ध्यान भटकना और त्वरित परिणाम की अपेक्षा भी प्रमुख कारण हैं।
शिक्षा प्रणाली पर भी उठाए सवाल : राजीव कुमार चौहान ने वर्तमान परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि बिहार बोर्ड का परीक्षा पैटर्न विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि परीक्षा में विश्लेषणात्मक और एप्लीकेशन आधारित प्रश्नों को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों की समझ और सोचने की क्षमता विकसित हो सके।
शिक्षक की भूमिका पर जोर :  उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के रूप में उनका प्रयास रहा है कि विद्यार्थियों को “स्पून फीडिंग” पर निर्भर न बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर और कॉन्सेप्ट आधारित लर्नर बनाया जाए। पटना और खगड़िया में वर्षों से पढ़ाते हुए उन्होंने छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया है।
अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील:  उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण रखने और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करने की अपील की। वहीं विद्यार्थियों को संदेश दिया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसके लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और सही दिशा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी आदतों में सुधार लाना होगा, अभिभावकों और शिक्षकों को उचित मार्गदर्शन देना होगा तथा शिक्षा प्रणाली में समयानुकूल बदलाव जरूरी है। तभी विद्यार्थियों का भविष्य उज्ज्वल और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।

नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक

 

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