
नगर परिषद खगड़िया में कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ नगर सभापति समेत कई वार्ड पार्षदों ने जताई नाराजगी… बोर्ड बैठक का पत्र रिसीव नहीं करने, सरकारी संचिकाओं एवं प्रस्ताव पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराने और अमर्यादित व्यवहार के लगाए आरोप… जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
नगर परिषद खगड़िया में कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ नगर सभापति समेत कई वार्ड पार्षदों ने जताई नाराजगी… बोर्ड बैठक का पत्र रिसीव नहीं करने, सरकारी संचिकाओं एवं प्रस्ताव पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराने और अमर्यादित व्यवहार के लगाए आरोप… जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ नगर परिषद खगड़िया में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और कार्यपालक पदाधिकारी के बीच प्रशासनिक विवाद गहराता जा रहा है। नगर सभापति अर्चना कुमारी के नेतृत्व में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों एवं दर्जनों वार्ड पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनके विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों ने भ्रष्टाचार, अमर्यादित व्यवहार, सरकारी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने तथा कार्यालय की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं से संबंधित आरोप लगाए हैं।
जनप्रतिनिधियों के अनुसार, बोर्ड की बैठक बुलाने के लिए नगर सभापति द्वारा भेजे गए आधिकारिक पत्र को कार्यालय में रिसीव नहीं किया गया। इसके बाद नगर सभापति को कथित तौर पर कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यालय के गेट पर ही बैठक संबंधी पत्र चिपकाना पड़ा। इस घटनाक्रम को लेकर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए इसे नगर परिषद की प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय बताया है।
महत्वपूर्ण संचिकाओं और प्रस्ताव पुस्तिका की उपलब्धता पर सवाल
विवाद का एक प्रमुख मुद्दा नगर परिषद की महत्वपूर्ण सरकारी संचिकाओं एवं प्रस्ताव पुस्तिका की उपलब्धता को लेकर है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि नगर सभापति द्वारा संबंधित अभिलेखों की मांग किए जाने के बावजूद उन्हें रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना है कि प्रस्ताव पुस्तिका में बोर्ड की बैठकों में पारित प्रस्तावों एवं निर्णयों का महत्वपूर्ण विवरण दर्ज रहता है। वहीं सरकारी संचिकाओं में योजनाओं, प्रशासनिक स्वीकृतियों और वित्तीय कार्यों से संबंधित दस्तावेज होते हैं। ऐसे में इन अभिलेखों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
दोपहर तीन बजे कार्यालय बंद होने की शिकायत
जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर सभापति द्वारा संचिकाओं एवं प्रस्ताव पुस्तिका की मांग किए जाने के बाद दोपहर करीब तीन बजे ही कार्यालय के विभिन्न कक्षों में ताला लगाकर कर्मचारी चले गए। इसको लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, कर्मचारियों के कार्यालय छोड़ने के कारणों एवं उस दिन की वास्तविक कार्यालय व्यवस्था की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
आगत-निर्गत पंजी को लेकर भी उठे सवाल
आगत-निर्गत पंजी की उपलब्धता को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि कार्यपालक पदाधिकारी उक्त पंजी अपने साथ ले गए हैं। इस संबंध में उन्होंने आशंका जताई कि सरकारी पत्राचार एवं अभिलेखों की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। जनप्रतिनिधियों ने पंजी सहित सभी महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेखों की तत्काल जांच और सुरक्षित रखे जाने की मांग की है। हालांकि, अभिलेखों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या बदलाव किए जाने का कोई प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है।
अमर्यादित व्यवहार और भ्रष्टाचार के भी लगाए आरोप
नगर सभापति अर्चना कुमारी सहित सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों एवं वार्ड पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी पर जनप्रतिनिधियों के साथ गाली-गलौज और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं एवं विकास योजनाओं को लेकर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखते हैं। ऐसे में उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार और प्रशासनिक समन्वय जरूरी है।
जनप्रतिनिधियों ने कार्यपालक पदाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार एवं कथित अनियमितताओं की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नगर परिषद में संचालित योजनाओं और वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
इस दौरान वार्ड पार्षद शिवराज यादव, पप्पू यादव, रंजीत सिंह, ऋतुराज कुमार सहित दर्जनों जनप्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। सभी ने नगर परिषद के कामकाज में पारदर्शिता, सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उच्चस्तरीय जांच और अभिलेखों के सत्यापन की मांग
जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन एवं नगर विकास एवं आवास विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में बोर्ड बैठक के पत्र को रिसीव नहीं किए जाने के कारणों की जांच, महत्वपूर्ण संचिकाओं एवं प्रस्ताव पुस्तिका की भौतिक जांच, आगत-निर्गत पंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका का सत्यापन शामिल है।
साथ ही, जनप्रतिनिधियों ने आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
फिलहाल इस पूरे मामले में कार्यपालक पदाधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस विवाद पर कब संज्ञान लेता है और नगर परिषद की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।
“इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।”
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