
मां कात्यायनी धाम में 11 से 19 अक्टूबर तक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन… दीदी अनन्या शर्मा करेंगी कथा वाचन…नवरात्र के पावन अवसर पर नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन : युवराज शंभू
मां कात्यायनी धाम में 11 से 19 अक्टूबर तक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन… दीदी अनन्या शर्मा करेंगी कथा वाचन…नवरात्र के पावन अवसर पर नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन : युवराज शंभू
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ शारदीय नवरात्र 2026 के पावन अवसर पर खगड़िया जिले के प्रसिद्ध मां कात्यायनी धाम में 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। चौथम प्रखंड क्षेत्र में कोसी नदी के तट पर स्थित इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर आयोजित कथा में मध्य प्रदेश के सिवनी मालवा की कथावाचिका दीदी अनन्या शर्मा जी अपने मुखारविंद से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगी। कार्यक्रम प्रतिदिन दोपहर एक बजे से शाम छह बजे तक चलेगा।
मां कात्यायनी मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष युवराज शंभू एवं भवेश कुमार सन्नी ने श्रद्धालुओं से इस धार्मिक आयोजन में शामिल होकर कथा श्रवण करने की अपील की है। वहीं, सरपंच विनोद यादव, ललन यादव, त्रिभुवन जी, नाथू चौधरी, मुरली यादव सहित रोहियार-बंगलिया , बलकुंडा के समस्त ग्रामवासियों ने भी श्रद्धालुओं से आयोजन में भाग लेने का आग्रह किया है। नवरात्र के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति, अध्यात्म और धार्मिक आस्था का विशेष वातावरण रहने की उम्मीद है। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, धर्म, सदाचार और मानव जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
खगड़िया से लगभग 12 किलोमीटर दूर है मां कात्यायनी धाम
मां कात्यायनी स्थान जिला मुख्यालय खगड़िया से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर कोसी नदी के तट पर बदलाघाट और धमारा घाट रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित है। यह स्थान जिले के प्रमुख धार्मिक एवं आस्थागत केंद्रों में शामिल है। यहां मां कात्यायनी के मंदिर के साथ भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता का मंदिर भी स्थापित है। प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और मां से सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
सिद्धपीठ और दुधारू पशुओं की लोकदेवी के रूप में होती है पूजा
मां कात्यायनी धाम की विशेष पहचान यहां प्रचलित धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय लोक परंपराओं से जुड़ी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ श्रद्धालु मां कात्यायनी को सिद्धपीठ के रूप में पूजते हैं, जबकि बड़ी संख्या में भक्त उन्हें दुधारू पशुओं की लोकदेवी मानकर आराधना करते हैं। इसी लोक आस्था के तहत श्रद्धालु मां के दरबार में कच्चा दूध अर्पित करते हैं। यह परंपरा क्षेत्र की ग्रामीण संस्कृति, पशुपालन और पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक आस्था को दर्शाती है।
नवरात्र में भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश
नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, धर्म, सदाचार और मानव जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। संगीतमय कथा और भजन-कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण में कथा श्रवण का अवसर मिलेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि इस धार्मिक कार्यक्रम में खगड़िया जिले के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
हर घर में नौ दीप जलाने की अपील
आयोजन संबंधी संदेश में श्रद्धालुओं से नवरात्र के दौरान मां कात्यायनी के नाम पर अपने-अपने घरों में कम-से-कम नौ दीप प्रज्वलित करने की अपील की गई है। मां कात्यायनी मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष युवराज शंभू एवं भवेश कुमार सन्नी ने भक्तों से 11 से 19 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा में अधिकाधिक संख्या में शामिल होकर धार्मिक आयोजन को सफल बनाने का आग्रह किया है। मां कात्यायनी धाम की विशिष्ट धार्मिक पहचान, कोसी नदी के तट पर इसकी अवस्थिति और कच्चा दूध अर्पित करने की लोक परंपरा इसे क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनाती है। नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित होने वाली यह संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा धार्मिक श्रद्धा, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के संगम का अवसर बनेगी।
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