खगड़िया: राजेंद्र सरोवर के विकास के साथ अतिक्रमण का मुद्दा भी गरमाया…ज्योतिष मिश्रा बोले—सार्वजनिक जमीन बचाना मेरी प्राथमिकता…जनता से किया वादा निभाऊंगा…

खगड़िया: राजेंद्र सरोवर के विकास के साथ अतिक्रमण का मुद्दा भी गरमाया…ज्योतिष मिश्रा बोले—सार्वजनिक जमीन बचाना मेरी प्राथमिकता…जनता से किया वादा निभाऊंगा…

खगड़िया कौशी एक्सप्रेस/ शहर के महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल राजेंद्र सरोवर के विकास एवं सौंदर्यीकरण की दिशा में करीब ₹9.50 करोड़ की योजना पर काम शुरू हो गया है। कुछ दिन पूर्व मंत्री मदन सहनी द्वारा योजना का शिलान्यास किए जाने के बाद अब स्थल पर बाउंड्री निर्माण एवं सौंदर्यीकरण से संबंधित कार्य प्रारंभ हो चुका है। योजना के धरातल पर उतरने के साथ ही राजेंद्र सरोवर की सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमणमुक्त एवं सुरक्षित रखने का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया है।

नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा ने कहा है कि राजेंद्र सरोवर की सार्वजनिक जमीन के संरक्षण के लिए वे आखिरी दम तक कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि सार्वजनिक जमीन को बचाने के लिए आवश्यकता पड़ी तो वे सक्षम न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि जनता से जो वादा किया गया है, उसे पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उनके अनुसार निजी जमीन के लिए तो लोग संघर्ष करते हैं, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा की लड़ाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों के हित से जुड़ी संपत्ति है।

पहले हो सार्वजनिक भूमि का सीमांकन एवं सत्यापन

राजेंद्र सरोवर के विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजना शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि निर्माण कार्य के साथ-साथ संबंधित भूमि का विधिवत सीमांकन, मापी एवं अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कराया जाए। यदि किसी स्थान पर सरकारी अथवा सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा संबंधित कानून एवं निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाए। बाउंड्री निर्माण शुरू होने के बाद सरोवर की सीमा को स्पष्ट करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना भविष्य में किसी विवाद अथवा निर्माण संबंधी बाधा को रोकने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सार्वजनिक संपत्ति किसी व्यक्ति विशेष की नहीं

ज्योतिष मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “लोग अपनी निजी जमीन के लिए लड़ते हैं, लेकिन मैं सार्वजनिक संपत्ति के लिए लड़ रहा हूं। यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों की संपत्ति है।” उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जमीन पर यदि किसी प्रकार का दावा, कब्जा अथवा अतिक्रमण है तो उसका निर्णय सरकारी अभिलेख, विधिवत सीमांकन और सक्षम न्यायिक/प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

9.50 करोड़ की योजना पूरे शहर के हित में

ज्योतिष मिश्रा ने कहा कि काफी प्रयास के बाद राजेंद्र सरोवर के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए करीब ₹9.50 करोड़ की योजना लाई गई है। यह योजना किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे खगड़िया शहर के हित में है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य तभी अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सकेगा, जब योजना के लिए निर्धारित सार्वजनिक भूमि सुरक्षित रहे और निर्माण कार्य स्वीकृत योजना एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा हो।

अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी

स्थानीय लोगों का कहना है कि राजेंद्र सरोवर के विकास के साथ इसकी भूमि की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। प्रशासन द्वारा यदि स्थल की मापी एवं सीमांकन कराकर अतिक्रमण की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाती है, तो इससे भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों की संभावना कम होगी। साथ ही, यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा सार्वजनिक भूमि पर अनधिकृत कब्जा पाया जाता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत नोटिस, सुनवाई एवं अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

विकास कार्य की गुणवत्ता और भूमि की निगरानी भी जरूरी

करीब 9.50 करोड़ की लागत वाली इस योजना को देखते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निर्धारित भूमि, बाउंड्री की स्थिति, कार्य की प्रगति और योजना के प्रावधानों की नियमित निगरानी आवश्यक है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सार्वजनिक धन से शुरू की गई योजना अपने निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप पूरी हो। नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी। जनता से किया गया वादा निभाना ही मेरा संकल्प है। अब निगाह इस बात पर है कि राजेंद्र सरोवर की भूमि का सीमांकन एवं अतिक्रमण संबंधी स्थिति प्रशासनिक स्तर पर किस प्रकार स्पष्ट की जाती है और ₹9.50 करोड़ की विकास योजना को निर्धारित स्वरूप में किस गति से पूरा किया जाता है।

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