खगड़िया: बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर डीएम विक्रम विरकर ने की व्यापक समीक्षा…सभी विभागों को पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश…

खगड़िया: बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर डीएम विक्रम विरकर ने की व्यापक समीक्षा…सभी विभागों को पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश…

खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ संभावित बाढ़ की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी विक्रम विरकर की अध्यक्षता में मंगलवार को समाहरणालय सभाकक्ष में बाढ़ पूर्व तैयारियों की व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, सभी संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा करते हुए समयबद्ध, समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तत्परता के साथ निर्वहन करें।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि खगड़िया जिले के सात अंचलों की करीब 48 पंचायतों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। वर्तमान में बागमती, कोसी एवं बूढ़ी गंडक नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि की प्रवृत्ति देखी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
संभावित बाढ़ को देखते हुए जिले में 56 मानव बाढ़ राहत शिविर एवं 139 सामुदायिक रसोई चिह्नित की गई हैं। इन सभी स्थलों पर आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी अंतिम चरण में है। साथ ही सभी तटबंधों की प्रतिदिन निगरानी कर उनका खैरियत प्रतिवेदन प्राप्त किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की क्षति की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सूखा राशन, खाद्यान्न, पेयजल, पशुचारा, नाव, आवश्यक मशीनरी तथा अन्य राहत सामग्रियों की पर्याप्त उपलब्धता पहले से सुनिश्चित कर ली जाए, ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।
बैठक में बताया गया कि जिले के सभी प्रखंडों में 44 प्रकार की पशु औषधियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा मानव स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक दवाएं, चिकित्सकीय टीमें एवं स्वास्थ्य संस्थानों को भी पूरी तरह तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
समीक्षा के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि जिले में वर्तमान में 1,651 गर्भवती एवं 1,537 धात्री महिलाओं की पहचान की जा चुकी है। इसके अलावा वृद्धजन, दिव्यांगजन, गंभीर रोगियों एवं अन्य संवेदनशील वर्गों की भी सूची तैयार की जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जीविका दीदियों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं पंचायत स्तरीय कर्मियों के साथ सतत समन्वय बनाए रखें। उन्होंने अंचल अधिकारियों एवं प्रखंड विकास पदाधिकारियों को नावों की उपलब्धता, ऊंचे स्थानों की पहचान, राहत शिविरों की तैयारी, पेयजल, स्वच्छता, विद्युत एवं संचार व्यवस्था सहित सभी संसाधनों का समय पर भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य संभावित बाढ़ की स्थिति में जन-धन की क्षति को न्यूनतम रखना तथा प्रभावित लोगों को समय पर राहत एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय, सतर्कता एवं निरंतर निगरानी के साथ कार्य करें।

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