
खगड़िया: गंगा के बढ़ते कटाव से उजड़ने की कगार पर 70 हजार जिंदगियां… 20-25 हजार एकड़ जमीन पर संकट… माथार दियारा की दर्दभरी पुकार डीएम तक पहुंची…स्थाई समाधान की गुहार…
खगड़िया: गंगा के बढ़ते कटाव से उजड़ने की कगार पर 70 हजार जिंदगियां… 20-25 हजार एकड़ जमीन पर संकट... माथार दियारा की दर्दभरी पुकार डीएम तक पहुंची…स्थाई समाधान की गुहार…
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ माथार दियारा क्षेत्र में लगातार हो रहे गंगा कटाव को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, नागेंद्र सिंह त्यागी एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य कृष्ण कुमार मुन्ना के नेतृत्व में खगड़िया, बेगूसराय और मुंगेर जिले के पांच पंचायतों के प्रतिनिधियों का एक शिष्टमंडल जिलाधिकारी खगड़िया से मिला।
शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी को स्मार पत्र सौंपते हुए गंगा कटाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए अविलंब ठोस और सार्थक पहल करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता नागेंद्र सिंह त्यागी, जितेंद्र यादव (पैक्स अध्यक्ष), संजय यादव (पूर्व मुखिया), मक्खन शाह, प्रद्युमन सिंह, सुमित चौधरी, मुकेश यादव, मौसम कुमार, गोलू, अरुण यादव, मनोज यादव, उमेश यादव, आमोद यादव, घनश्याम कुमार, नागेश्वर यादव, रमाकांत दास, विजय कुमार, राकेश पासवान, शास्त्री, बबलू यादव, वीर प्रकाश यादव, सदानंद यादव सहित कई लोग मौजूद थे।

जिलाधिकारी ने शिष्टमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि इस समस्या से सरकार को पहले भी अवगत कराया जा चुका है। इसके बाद बिहार सरकार की तकनीकी टीम द्वारा कटाव स्थल का निरीक्षण किया गया था। जांच टीम के अनुसार गंगा कटाव का स्थायी समाधान लगभग 1000 से 2000 करोड़ रुपये की लागत से संभव है, जो राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयास से ही पूरा किया जा सकता है।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि यदि यह कार्य 80-90 लाख रुपये के दायरे में होता, तो जिला प्रशासन अपने स्तर से इसे पूरा कर सकता था। उन्होंने शिष्टमंडल से यह भी आग्रह किया कि चूंकि कई प्रतिनिधि वर्तमान सरकार से जुड़े हैं, इसलिए वे अपने स्तर पर भी सरकार तक इस मुद्दे को मजबूती से पहुंचाएं।
जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि शिष्टमंडल द्वारा दिए गए आवेदन को पुनः सरकार के समक्ष भेजकर समस्या की गंभीरता से अवगत कराया जाएगा।
नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
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