खगड़िया में मेडिकल संस्थान की जमीन को लेकर विवाद गहराया…प्रेसवार्ता में डॉ विवेकानंद ने उठाए गंभीर सवाल…डीएम- एसपी से जांच की मांग…

खगड़िया में मेडिकल संस्थान की जमीन को लेकर विवाद गहराया…प्रेसवार्ता में डॉ विवेकानंद ने उठाए गंभीर सवाल…डीएम- एसपी से जांच की मांग…

खगड़िया /कौशी एक्सप्रेस/ सोमवार को डॉ विवेकानंद (संस्थापक सह निदेशक, श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल/नर्सिंग/पैरामेडिकल संस्थान) द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में संस्थान एवं श्यामलाल ट्रस्ट की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर कई गंभीर बिंदुओं को सार्वजनिक किया गया। उन्होंने पूरे मामले में प्रशासन से निष्पक्ष जांच एवं उच्चस्तरीय जांच टीम गठित करने की मांग की।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए डॉ विवेकानंद ने बताया कि वर्ष 2006 से श्यामलाल ट्रस्ट की जमीन लीज पर लेकर परमानंदपुर स्थित संस्थान संचालित किया जा रहा है। संस्थान का नवीकरण प्रतिवर्ष नियमित रूप से होता रहा है तथा कई बार जिला प्रशासन एवं एडीएम स्तर से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र भी निर्गत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान वर्षों से क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में जिले की कई जमीनों से जुड़े दस्तावेजों में कथित रूप से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में श्यामलाल ट्रस्ट की उस जमीन, जिस पर वर्ष 2006 से संस्थान संचालित हो रहा है, उससे संबंधित पुराने दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड में कथित बदलाव किए जाने और जमीन से संबंधित अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास हुआ है।

डॉ विवेकानंद ने बताया कि इस मामले में अंचलाधिकारी, खगड़िया द्वारा संबंधित म्यूटेशन आवेदन को पूर्व में अस्वीकृत कर दिया गया था। इसके बावजूद बाद में डीसीएलआर स्तर से एक आदेश जारी किया गया, जिसमें संस्थान की चहारदीवारी एवं निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि इस आदेश की प्रक्रिया एवं परिस्थितियों को लेकर कई प्रश्न खड़े होते हैं, क्योंकि पूर्व में संबंधित अधिकारियों को रजिस्टर-2 में कथित छेड़छाड़ और जमाबंदी रद्द करने के लिए आवेदन भी दिया जा चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रस्ट और संस्थान समाज की धरोहर है तथा इसकी सार्वजनिक संपत्ति को लेकर चल रहे पूरे घटनाक्रम की जानकारी समाज के सामने आनी चाहिए। डॉ विवेकानंद ने कहा कि डीसीएलआर स्तर से बिना समुचित नोटिस दिए एकतरफा निर्णय लिए जाने की बात उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित जमीन की मापी पूर्व में अमीन से कराई जा चुकी है तथा रिपोर्ट में संस्थान के कब्जे की स्थिति स्पष्ट होने का दावा किया गया है, लेकिन वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
वहीं पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने बताया कि श्यामलाल ट्रस्ट से जुड़े संबंधित लोगों ने उन्हें इस पूरे मामले में अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने का भरोसा दिया है, क्योंकि ट्रस्ट की संपत्ति से जुड़े वास्तविक तथ्यों का सामने आना जरूरी है।
इस दौरान डॉ विवेकानंद ने कहा कि जिस जमीन पर संस्थान विगत कई वर्षों से संचालित है, उसी संस्थान से प्रशिक्षित होकर बड़ी संख्या में पैरामेडिकल छात्र आज विभिन्न सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा, रोजगार और जनसेवा का मजबूत केंद्र बन चुका है। इसके बावजूद नव निर्मित कॉलेज की जमीन को लेकर कथित दस्तावेजी विवाद के आधार पर संस्थान को परेशान करने तथा विकास कार्यों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने नवपदस्थापित जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से अनुरोध करते हुए कहा कि पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि संस्थान एवं ट्रस्ट की सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके और वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
डॉ विवेकानंद ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा से जुड़े इस संस्थान को अनावश्यक विवादों से बचाते हुए सच्चाई सामने लाना है।
प्रेसवार्ता के अवसर पर समाजसेवी प्रफुल चंद्र घोष, इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

(यह समाचार प्रेसवार्ता में डॉ विवेकानंद द्वारा दिए गए वक्तव्य एवं आरोपों/दावों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

 

विधिक अस्वीकरण (Disclaimer):
कौशी एक्सप्रेस समाचार पत्र/पोर्टल में प्रकाशित अथवा प्रसारित समाचार, विज्ञप्ति, लेख एवं सूचनाएँ संबंधित संस्थान, संगठन, व्यक्ति अथवा अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रेस विज्ञप्ति, दस्तावेज़ अथवा जानकारी के आधार पर प्रकाशित/प्रसारित की जाती हैं। उक्त सामग्री में वर्णित तथ्यों, दावों, कथनों एवं विचारों की सत्यता, वैधता एवं संपूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित प्रेषक का होगा। संपादक, प्रकाशक अथवा संस्थान किसी भी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष कानूनी दायित्व हेतु उत्तरदायी नहीं होंगे। आवश्यकतानुसार संपादक/प्रकाशक को संशोधन, संक्षेपण, निरस्तीकरण अथवा प्रकाशन अस्वीकार करने का पूर्ण अधिकार सुरक्षित रहेगा।
नोट: इस प्रकाशन/प्रसारण से उत्पन्न किसी भी विवाद अथवा कानूनी कार्यवाही हेतु क्षेत्राधिकार केवल खगड़िया व्यवहार न्यायालय तथा पटना उच्च न्यायालय को ही मान्य होगा।

नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
*

 

 

 

Live Share Market

जवाब जरूर दे 

आप अपने सहर के वर्तमान बिधायक के कार्यों से कितना संतुष्ट है ?

View Results

Loading ... Loading ...

Related Articles

Back to top button
Close
Close