
बलौर–बोचघसका–कमाथान पुल निर्माण का रास्ता साफ…विधानसभा में विधायक बबलू कुमार के सवाल पर सरकार ने बताई पूरी स्थिति…विधायक बोले— पुल निर्माण शुरू होने तक चैन से नहीं बैठूंगा…
बलौर–बोचघसका–कमाथान पुल निर्माण का रास्ता साफ…विधानसभा में विधायक बबलू कुमार के सवाल पर सरकार ने बताई पूरी स्थिति…
विधायक बोले— पुल निर्माण शुरू होने तक चैन से नहीं बैठूंगा…
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ सदर प्रखंड की उत्तर माड़र पंचायत के बलौर, बोचघसका और कमाथान गांवों में प्रस्तावित तीन हाई लेवल पुलों के निर्माण का रास्ता एक बार फिर खुलता दिखाई दे रहा है। बिहार विधानसभा में खगड़िया के विधायक बबलू कुमार द्वारा उठाए गए तारांकित प्रश्न के जवाब में ग्रामीण कार्य विभाग ने पूरे मामले की वर्तमान स्थिति और अब तक की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिला संचालन समिति से अनुमोदित प्राथमिकता सूची प्राप्त होने तथा निधि उपलब्ध होने के बाद तीनों पुलों के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
विधानसभा में विधायक बबलू कुमार ने सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए कहा कि बेलौर, बोचघसका एवं कमाथान स्थित नदियों पर पुल निर्माण के लिए पहले निविदा प्रक्रिया पूरी की गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से उसे निरस्त कर दिया गया। इसके कारण आज भी हजारों ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इन तीनों पुलों के निर्माण के लिए पुनः निविदा आमंत्रित कर शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के अंतर्गत एक पैकेज में तीन हाई लेवल पुलों का निर्माण प्रस्तावित था। इसमें कमाथान के पास बरसोटा घाट, बोचघसका के पास घोड़ाजन नदी तथा बलौर के पास खोनमा धार नदी पर पुल का निर्माण किया जाना था।
मंत्री ने बताया कि पहली बार आमंत्रित निविदा में किसी भी संवेदक ने भाग नहीं लिया, जिसके कारण प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी। इसके बाद री-टेंडर जारी किया गया। पुनः निविदा प्रक्रिया में मैसर्स जय माता दी कंस्ट्रक्शन (यदुवंशम इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड जेवी) को सफल घोषित करते हुए 17 सितंबर 2025 को कार्यादेश भी जारी कर दिया गया था।
हालांकि बाद में जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित संवेदक द्वारा निविदा में गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। इसके बाद कंपनी का निबंधन दो वर्षों के लिए काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया गया तथा 25 नवंबर 2025 को जारी कार्यादेश भी निरस्त कर दिया गया।
सरकार ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि अब जिला संचालन समिति से अनुमोदित पुलों की प्राथमिकता सूची मांगी गई है। सूची प्राप्त होने, तकनीकी स्वीकृति मिलने तथा आवश्यक निधि उपलब्ध होने के बाद इन तीनों पुलों के निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में सरकार के इस जवाब के बाद विधायक बबलू कुमार ने कहा कि तीनों पुलों का निर्माण सरकार की प्राथमिकता में है और वे स्वयं इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि जिला संचालन समिति की अगली बैठक में इन पुलों को प्राथमिकता सूची में शामिल कराने के लिए पहल करेंगे और उसकी रिपोर्ट सरकार को शीघ्र भेजी जाएगी, ताकि टेंडर की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।
विधायक ने कहा, “मैं तब तक चैन से नहीं बैठूंगा, जब तक तीनों पुलों का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो जाता। क्षेत्र की जनता को बेहतर आवागमन की सुविधा दिलाना मेरी प्राथमिकता है। इस संबंध में मैंने ग्रामीण कार्य मंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी पत्र सौंपा है। मुझे विश्वास है कि जल्द ही पुल निर्माण का कार्य धरातल पर दिखाई देगा।”
स्थानीय लोगों का मानना है कि बलौर, बोचघसका और कमाथान में पुल बनने से बरसात के दिनों में होने वाली आवागमन की परेशानी काफी हद तक समाप्त होगी। साथ ही हजारों ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बाजार तक आने-जाने में बड़ी सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।
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