सशक्त स्थायी समिति चुनाव प्रावधान पर गरजीं नप सभापति अर्चना कुमारी…बोलीं— तो फिर मंत्रियों का भी चुनाव कराइए..

सशक्त स्थायी समिति चुनाव प्रावधान पर गरजीं नप सभापति अर्चना कुमारी…बोलीं— तो फिर मंत्रियों का भी चुनाव कराइए..

खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ बिहार नगर पालिका संशोधन अधिनियम-2026 के तहत सशक्त स्थायी समिति के चुनाव संबंधी प्रावधान को लेकर नगर निकायों में विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। नगर परिषद खगड़िया की नगर सभापति अर्चना कुमारी ने नई व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि नगर निकायों में सभापति को अपनी कार्यशैली के अनुरूप टीम के साथ काम करने का अधिकार नहीं मिलेगा, तो विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है।
नगर सभापति ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “यदि हर व्यवस्था चुनाव के आधार पर ही संचालित करनी है, तो मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के केबिनेट मंत्रियों का भी चुनाव सांसदों एवं विधायकों से कराया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार में मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री अपनी प्राथमिकताओं और प्रशासनिक दृष्टिकोण के अनुसार मंत्रिमंडल का गठन करते हैं, जिससे नीतिगत निर्णयों एवं विकास कार्यों में समन्वय बना रहे। इसी प्रकार नगर निकायों में भी सभापति को सशक्त स्थायी समिति के गठन में प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सशक्त स्थायी समिति नगर निकायों की “मिनी कैबिनेट” होती है, जहां सड़क, नाला, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, निर्माण कार्य समेत करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं। ऐसे में यदि समिति में केवल राजनीतिक समीकरण या विरोध के आधार पर सदस्य चुने जाएंगे, तो निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होगी और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
अर्चना कुमारी ने आशंका जताई कि वर्तमान प्रावधान के तहत यदि संयोगवश समिति में अधिकांश विरोधी सदस्य पहुंच जाते हैं, तो नगर परिषद की प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। विकास योजनाओं में अनावश्यक अड़चनें, बैठकों में गतिरोध और राजनीतिक दबाव जैसी स्थितियां आम हो सकती हैं। इसका सीधा प्रभाव जनता से जुड़े विकास कार्यों की गति पर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था से हॉर्स ट्रेडिंग जैसी संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इससे लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है और जनप्रतिनिधियों के बीच अनावश्यक राजनीतिक खींचतान बढ़ने का खतरा रहेगा। उन्होंने कहा कि नगर निकायों का मूल उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना और शहर के विकास को गति देना है।
नगर सभापति ने बिहार सरकार से मांग करते हुए कहा कि जनहित, नगर विकास तथा प्रशासनिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए बिहार नगर पालिका संशोधन अधिनियम-2026 के इस प्रावधान पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए, ताकि नगर निकायों में विकास कार्य निर्बाध रूप से संचालित हों और आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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