
खगड़िया राजद कार्यालय में होली मिलन समारोह का आयोजन…मनोहर कुमार यादव बोले— होली हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान
खगड़िया राजद कार्यालय में होली मिलन समारोह का आयोजन…मनोहर कुमार यादव बोले— होली हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ बीते 03 मार्च 2026 दिन मंगलवार को कृष्णापुरी बलुआही स्थित जिला राष्ट्रीय जनता दल कार्यालय में राजद जिलाध्यक्ष सह पूर्व एमएलसी प्रत्याशी मनोहर कुमार यादव ने होली मिलन समारोह का आयोजन किया।
होली मिलन समारोह में राजद कार्यकर्ताओं और शहर के गणमान्य लोगों सहित मीडिया के साथी ने उपस्थित होकर एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर एक दूसरे को होली की बधाई एवं शुभकामनाएं दिया।

सर्वप्रथम राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव एवं पूर्व नगर सभापति सीता कुमारी ने होली मिलन समारोह में उपस्थित सभी लोगों को अबीर गुलाल लगाकर होली की बधाई दी और बड़ों से आशीर्वाद लिया।देखते देखते सैकड़ों की संख्या उपस्थित लोगों ने भी राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव के साथ होली खेलते हुए एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर खुशी के साथ होली पर्व की एक दूसरे को बधाई दिया और गाँव के फगुआ गीत पर झूमते हुए खूब मनोरंजन किया।
पूर्व एमएलसी प्रत्याशी सह राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने कहा कि होली पर्व में जो लोकगायन का प्रचलन था कि गाँव के लोग एक महीने पहले से होली गाते थे ।गाँव की होली की परम्परागत होली और संस्कृति को कायम रखने के लिए गाँव से फगुआ गाने वालों को बुलवाकर फगुआ गीत गवाया।इस फगुआ गीत का लोगों ने खूब पसंद आया और खूब झूमे ।
बिहार के पारंपरिक होली की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। बिहार के गांव में जो होली होती थी, उसकी कोई मिसाल नहीं है. एक सप्ताह पहले से ही लोग फगुआ गाना शुरू कर देते थे। धीरे-धीरे परंपराओं का प्रवाह शहर की ओर हो रहा है और अब शहरों में भी पारंपरिक होली की झलक देखने को मिल रही है। हालांकि आधुनिकता के दौर में होली का स्वरूप बहुत बदल गया है। रंगों का त्योहार होली बिहार की सांस्कृतिक विरासत की पहचान है।होली उत्सव कभी गांव की चौपाल, ढोल-मांदर और फगुआ गीतों से गूंजती थी तो आज उसकी जगह डीजे, ऑर्गेनिक कलर और सोशल मीडिया रील्स ने ले ली है। समय के साथ बिहार की होली का स्वरूप बदला है, लेकिन इसकी आत्मा आज भी परंपरा से जुड़ी हुई है।
पहले होली की शुरुआत फाल्गुन माह में फगुआ गीतों से होती थी। गांवों में टोलियां बनती थीं, लोग घर-घर जाकर अबीर-गुलाल लगाते और पारंपरिक पकवान गुजिया, मालपुआ और ठंडई का आनंद उठाते थे। होलिका दहन के दिन पूरे गांव में सामूहिक आयोजन होता था और आयोजन सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता था।
बिहार में पारंपरिक होली (फगुआ) लोकगीतों, विशेषकर ‘जोगीरा’, ढोलक, मजीरा और मृदंग के साथ मनाई जाती है। यह त्योहार वसंत पंचमी से ही शुरू होकर फागुन भर चलता है। इसमें राधा-कृष्ण के प्रेम, प्राकृतिक सौंदर्य और हास्य-व्यंग्य से भरे लोकगीतों के साथ रंग-गुलाल खेला जाता है, जो ग्रामीण संस्कृति और सामुदायिक मेलजोल का अनूठा प्रतीक है।
होली मिलन समारोह में मुख्य रूप से पूर्व वार्ड पार्षद सह राजद जिला मीडिया प्रभारी रणवीर कुमार,बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बिनोद कुमार,जिला उपाध्यक्ष प्रमोद यादव,राजद के वरिष्ठ नेतागजेंद्र यादव, जिला महासचिव सह वार्ड पार्षद पप्पू यादव,मानसी नगर पंचायत उपमुख्य पार्षद पप्पू सुमन,युवा जिलाध्यक्ष उदय यादव,पंचायतीराज प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष राजकिशोर राज,पंचायतीराज प्रकोष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सुबोध यादव,जिला प्रवक्ता अजीत सरकार, खगड़िया नगर अध्यक्ष चंद्रशेखर कुमार,पूर्व नगर उपसभापति सुनील पटेल, गुग्गु यादव,पूर्व वार्ड पार्षद जितेंद्र गुप्ता,गोगरी नगर अध्यक्ष शम्भू यादव,गोगरी प्रखंड अध्यक्ष शशि पासवान,मानसी प्रखंड अध्यक्ष तेजनारायण यादव,मानसी नगर अध्यक्ष रविश यादव,राजद नेता आमिर खान, मिथलेश यादव, जितेंद्र श्रीवास्तव,युवा शक्ति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।
नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
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