खगड़िया: BUIDCO नाला निर्माण की गुणवत्ता को लेकर नगर सभापति अर्चना कुमारी ने सांसद राजेश वर्मा का कराया ध्यान आकृष्ट… कचहरी रोड व सोनमंखी-गौशाला रोड के नाला निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग..

खगड़िया: BUIDCO नाला निर्माण की गुणवत्ता को लेकर नगर सभापति अर्चना कुमारी ने सांसद राजेश वर्मा का कराया ध्यान आकृष्ट…

कचहरी रोड व सोनमंखी-गौशाला रोड के नाला निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग..

खगड़िया /कौशी एक्सप्रेस/ नगर परिषद खगड़िया क्षेत्र के कचहरी रोड एवं सोनमंखी-गौशाला रोड में BUIDCO द्वारा कराए जा रहे निर्माणाधीन नाला की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर नगर सभापति अर्चना कुमारी ने चिंता जताई है। उन्होंने खगड़िया लोकसभा के सांसद को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करते हुए दोनों नालों की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। नगर सभापति ने कहा कि नाला निर्माण का उद्देश्य शहर की जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत करना और जलजमाव की समस्या से लोगों को राहत देना है। ऐसे में सरकारी राशि से हो रहे इस महत्वपूर्ण निर्माण में तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

स्थल निरीक्षण के बाद उठे तकनीकी सवाल

नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा की ओर से निर्माण कार्य को लेकर जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत किए जाने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद SDM धनंजय कुमार की अध्यक्षता में पुल निगम के कार्यपालक अभियंता, RCD के कार्यपालक अभियंता तथा नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी सिन्धु कमल की मौजूदगी में निर्माणाधीन नाले का स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान नाले के लेवल, एलाइनमेंट, कंक्रीट कार्य, निर्माण प्रक्रिया एवं क्यूरिंग समेत विभिन्न तकनीकी पहलुओं का जायजा लिया गया। नगर सभापति का कहना है कि उठाए गए तकनीकी बिंदुओं पर विस्तृत जांच आवश्यक है, ताकि निर्माण की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

क्यूरिंग अवधि को लेकर शिकायत

नगर सभापति द्वारा सांसद को भेजे गए पत्र में क्यूरिंग प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया गया है। शिकायत में कुछ स्थानों पर पर्याप्त अवधि तक क्यूरिंग नहीं किए जाने की बात कही गई है। नगर सभापति ने इस बिंदु की विशेषज्ञ अभियंताओं से तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया का पालन नहीं होना प्रमाणित होता है, तो इससे कंक्रीट की मजबूती और निर्माण की टिकाऊ क्षमता प्रभावित होने की आशंका की जांच की जानी चाहिए।

कंक्रीट में हनीकॉम्बिंग की शिकायत

निर्माणाधीन नाले के कंक्रीट कार्य में वाइब्रेटर के समुचित उपयोग को लेकर भी शिकायत सामने आई है। नगर सभापति के अनुसार, कुछ स्थानों पर कंक्रीट में हनीकॉम्बिंग एवं छेद जैसी स्थिति दिखाई देने की बात कही गई है।वोउन्होंने कहा कि इस प्रकार की शिकायतों की तकनीकी जांच आवश्यक है। यदि निर्माण प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन नहीं हुआ है तो समय रहते आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।

लेवल, ढलान और एलाइनमेंट की हो स्वतंत्र जांच

नगर सभापति ने नाले के लेवल एवं एलाइनमेंट को लेकर भी तकनीकी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जलनिकासी व्यवस्था प्रभावी रखने के लिए नाले की सही गहराई, चौड़ाई, लेवल और पर्याप्त ढलान महत्वपूर्ण है। उन्होंने सांसद से आग्रह किया कि संबंधित विभाग के विशेषज्ञ अभियंताओं के माध्यम से दोनों नालों की तकनीकी डिजाइन एवं स्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए, ताकि भविष्य में जलनिकासी से जुड़ी समस्या उत्पन्न न हो।

भविष्य के सड़क चौड़ीकरण को भी ध्यान में रखने की मांग

नगर सभापति ने कहा कि नाला निर्माण केवल वर्तमान जरूरतों को देखते हुए नहीं, बल्कि शहर के भविष्य के विकास को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। यदि संबंधित सड़कों के भविष्य में चौड़ीकरण की योजना है तो नाले के वर्तमान एलाइनमेंट की भी तकनीकी समीक्षा जरूरी है, ताकि बाद में विकास कार्य प्रभावित न हो।वोउन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में DPR, स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी डिजाइन के अनुरूप काम होना चाहिए।

गड़बड़ी प्रमाणित होने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग

नगर सभापति अर्चना कुमारी ने कहा कि यदि उच्चस्तरीय तकनीकी जांच में निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी कमी, तकनीकी मानकों की अनदेखी या अन्य अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि विकास कार्य जनता के हित में होते हैं और किसी भी परियोजना में गुणवत्ता एवं पारदर्शिता महत्वपूर्ण है।

“विकास कार्य जारी रहे, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं”

नगर सभापति ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य नाला निर्माण कार्य को रोकना नहीं है। शहर की जलनिकासी व्यवस्था के लिए यह कार्य आवश्यक है और परियोजना समय पर पूरी होनी चाहिए। लेकिन निर्माण मजबूत, टिकाऊ और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप हो, यह भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान यदि कोई तकनीकी कमी सामने आती है तो उसे समय रहते सुधारा जा सकता है। निर्माण पूरा होने के बाद कमी सामने आने पर दोबारा सरकारी राशि खर्च होने की स्थिति बन सकती है।

सांसद से हस्तक्षेप की अपील

नगर सभापति ने सांसद से मामले में आवश्यक हस्तक्षेप करते हुए संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन के स्तर पर स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच सुनिश्चित कराने में सहयोग का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जांच से निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और यदि कहीं सुधार की आवश्यकता है तो उसे समय रहते पूरा कराया जा सकेगा। नगर सभापति ने उम्मीद जताई कि प्रशासन एवं संबंधित विभाग तकनीकी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे, ताकि नाला निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा होकर लंबे समय तक शहर की जलनिकासी व्यवस्था में उपयोगी साबित हो।

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