
प्रेसवार्ता : श्याम लाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज में महिला छात्रावास में प्रवेश को लेकर संस्थान ने जताई आपत्ति…निष्पक्ष जांच की मांग — ईं. धर्मेंद्र
प्रेसवार्ता : श्याम लाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज में महिला छात्रावास में प्रवेश को लेकर संस्थान ने जताई आपत्ति…निष्पक्ष जांच की मांग — ईं. धर्मेंद्र
खगड़िया / कौशी एक्सप्रेस/ सोमवार 12 जनवरी 2026 को श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज परिसर में संस्थान प्रबंधन की ओर से एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में संस्थान ने स्पष्ट रूप से कहा कि कॉलेज सदैव कानून, संवैधानिक मूल्यों और विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का सम्मान करता आया है तथा किसी भी प्रकार की जांच या कार्रवाई केवल विधिक आदेश के तहत ही की जानी चाहिए।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए संस्थान के प्रबंधक ईं. धर्मेंद्र ने कहा कि बिना किसी विधिक आदेश, लिखित अनुमति अथवा विधिसम्मत प्रक्रिया के महिला छात्रावास में प्रवेश कर छात्राओं को कमरों में बंद कर पूछताछ किया जाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे छात्राओं को गंभीर मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और भय का वातावरण उत्पन्न हुआ। इस प्रकार की कार्रवाई से संस्थान की प्रतिष्ठा को भी गंभीर क्षति पहुँची है।
उन्होंने बताया कि संस्थान में देश-विदेश से छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत हैं। अनधिकृत प्रवेश एवं पूछताछ के दौरान छात्राओं के नाम, पते एवं अन्य गोपनीय जानकारियों के उजागर होने की आशंका बनी, जिससे आपराधिक तत्वों तक जानकारी पहुँचने, अपहरण जैसी गंभीर घटनाओं तथा सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं।

प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि संस्थान के चेयरमैन डॉ. स्वामी विवेकानंद द्वारा इस पूरे मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक, खगड़िया को विस्तृत लिखित शिकायत पत्र सौंपा गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि महिला छात्रावास जैसे संवेदनशील परिसर में बिना वारंट या आपातकालीन स्थिति के प्रवेश करना छात्राओं की निजता और गरिमा के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है। शैक्षणिक संस्थानों को विश्वविद्यालय अधिनियम एवं राज्य नियमों के अंतर्गत एक निश्चित स्वायत्तता प्राप्त है, जिसमें बिना संस्थान प्रमुख की अनुमति पुलिस हस्तक्षेप गंभीर प्रशासनिक अतिक्रमण माना जाता है। तलाशी अथवा पूछताछ के लिए विधिक वारंट अथवा स्पष्ट कानूनी आधार का अभाव प्रक्रियात्मक कानून एवं पुलिस आचरण नियमावली का उल्लंघन है। संबंधित महिला पुलिस पदाधिकारी द्वारा संस्थान के निदेशक को कथित रूप से गिरफ्तारी की धमकी देना पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है, जिससे कर्मचारियों में भय का माहौल बना और प्रशासनिक कार्य बाधित हुआ। पत्र में यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि जबरन छात्रावास में प्रवेश कर देश-विदेश से आई छात्राओं की गोपनीय जानकारी असामाजिक तत्वों तक पहुँच सकती है, जिससे अपहरण या अन्य गंभीर अपराधों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, यह भी कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई से पुलिस विभाग की छवि को भी नुकसान पहुँचा है।
संस्थान की ओर से यह जानकारी दी गई कि इस संबंध में माननीय राज्यपाल एवं माननीय कुलपति महोदय को भी स्थिति से अवगत करा दिया गया है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
प्रेस वार्ता में संस्थान प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन का संस्थान को सदैव सहयोग मिलता रहा है। हालांकि, एक महिला अधिकारी के अमर्यादित व्यवहार, नियमों के विरुद्ध परिसर में प्रवेश एवं रौब जमाने की प्रवृत्ति ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
अंत में संस्थान की ओर से मांग की गई कि संबंधित महिला पुलिस पदाधिकारी के विरुद्ध निष्पक्ष जाँच कर आवश्यक विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और छात्राओं की सुरक्षा, गरिमा एवं शैक्षणिक वातावरण सुरक्षित रह सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया प्रभारी अमरीष कुमार, रोगी कल्याण समिति के सदस्य प्रफुल्ल चंद्र घोष सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
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