खगड़िया: सुनियोजित पार्किंग और वैज्ञानिक ट्रैफिक प्लान से ही जाम का स्थाई समाधान संभव : आर्किटेक्ट शुभम्

खगड़िया: सुनियोजित पार्किंग और वैज्ञानिक ट्रैफिक प्लान से ही जाम का स्थाई समाधान संभव : आर्किटेक्ट शुभम्

खगड़िया /कौशी एक्सप्रेस/ शहर में लगातार बढ़ती जनसंख्या, वाहनों की संख्या में तेज़ इज़ाफा और अव्यवस्थित शहरी विकास के कारण यातायात जाम एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इस मुद्दे पर आर्किटेक्ट शुभम् ने कहा कि वर्तमान समय में ट्रैफिक जाम केवल आम लोगों की असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक नुकसान, समय की बर्बादी, बढ़ते प्रदूषण और नागरिकों के मानसिक तनाव का बड़ा कारण बन चुका है। उन्होंने कहा कि यातायात समस्या को केवल ट्रैफिक पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी मानना उचित नहीं है। यह समस्या शहर की समग्र योजना, सड़क डिज़ाइन, भूमि उपयोग और विशेष रूप से पार्किंग प्रबंधन से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। यदि शहर की योजना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से की जाए, तो बिना बड़े निर्माण कार्य के भी यातायात व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार संभव है। आर्किटेक्ट शुभम् ने शहर के प्रमुख यातायात केंद्र राजेन्द्र चौक का उदाहरण देते हुए कहा कि यह इलाका कई मुख्य सड़कों को जोड़ता है, लेकिन अनियंत्रित आवाजाही के कारण यहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके स्थाई समाधान के लिए राजेन्द्र चौक के चारों ओर लगभग 300 मीटर की परिधि में एक समन्वित और वैज्ञानिक ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। इससे न केवल यातायात नियंत्रित होगा, बल्कि दुर्घटनाओं में कमी आएगी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

उन्होंने बताया कि शहर में जाम का एक बड़ा कारण सुनियोजित पार्किंग की कमी है, खासकर दोपहिया वाहनों के लिए। व्यावसायिक क्षेत्रों में पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोग मजबूरी में सड़क किनारे वाहन खड़े करते हैं, जिससे सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है और यातायात बाधित होता है।
इस समस्या के समाधान के लिए मेन रोड, एनएसी रोड, एमजी रोड, मुर्गियां चौक, मिल रोड, कलेक्टरेट रोड और गौशाला रोड पर स्पष्ट रूप से चिन्हित, सुव्यवस्थित और नियंत्रित दोपहिया पार्किंग जोन विकसित किए जाने की आवश्यकता है। आर्किटेक्ट शुभम् ने यह भी सुझाव दिया कि यातायात दबाव को संतुलित करने और अनावश्यक क्रॉस मूवमेंट को रोकने के लिए कुछ प्रमुख सड़कों पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वन-वे या नो-एंट्री व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। साथ ही, उचित साइन बोर्ड, रोड मार्किंग और जन-जागरूकता के माध्यम से ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि यातायात समस्या का समाधान अस्थाई उपायों से संभव नहीं है। इसके लिए दीर्घकालिक शहरी दृष्टि, तकनीकी योजना, अनुशासित क्रियान्वयन और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। नगर प्रशासन, यातायात पुलिस, शहरी नियोजक, वास्तुकार और आम नागरिक—सभी के संयुक्त प्रयास से ही शहर को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुचारु यातायात व्यवस्था मिल सकती है।

 

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