गांधी पार्क बलुआही में मनाया गया शहीद दिवस… राजद जिलाध्यक्ष मनोहर यादव ने दिया सामाजिक एकता का संदेश

गांधी पार्क बलुआही में मनाया गया शहीद दिवस… राजद जिलाध्यक्ष मनोहर यादव ने दिया सामाजिक एकता का संदेश

खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ आज 30 जनवरी 2026 को गांधी पार्क बापू नगर बलुआही में गांधी जी का पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाया गया। सर्वप्रथम गांधी पार्क के अध्यक्ष महेश प्रसाद सिंह, सचिव सह राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव,युवा शक्ति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागेन्द्र सिंह त्यागी, पूर्व वार्ड पार्षद सह कोषाध्यक्ष रणवीर कुमार,सदस्य नंदन यादव, आमिर खान आदि ने गांधी जी के प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
पार्क के अध्यक्ष महेश प्रसाद सिंह ने कहा कि गांधी जी ने आजादी की लड़ाई अहिंसात्मक तरीके से लड़ाई लड़कर देश को आजाद कराया। आजादी के साथ-साथ स्वच्छता पर भी जोड़ देते हुए महात्मा गांधी ने कहा स्वच्छता न केवल शारीरिक स्वास्थ्य की आवश्यकता, बल्कि जीवनशैली और ईश्वर-प्राप्ति का अभिन्न अंग है। उन्होंने सफाई को स्वतंत्रता से ज्यादा महत्वपूर्ण माना और इसे आत्म-शुद्धि से जोड़ा। गांधीजी ने स्वयं सफाई करके, स्वच्छता को छुआछूत-उन्मूलन से जोड़ते हुए, देश को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
सचिव सह राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने कहा कि आज गांधी से सीख लेने की जरूरत है उन्होंने कहा कि भविष्य में क्या होगा, मैं यह नहीं सोचना चाहता। मुझे वर्तमान की चिंता है। ईश्वर ने मुझे आने वाले क्षणों पर कोई नियंत्रण नहीं दिया है। आज जो समाज में ऊंच-नीच जाति पाती का दौर है उसको गांधी की के विचार को अपना कर ही दूर किया जा सकता है और समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है। गांधी जी ने आजादी की लड़ाई में हिंदू, मुस्लिम,सिख ईसाई सभी समुदाय के लोगों को साथ कर लड़ा और भारत को अंग्रेजों से आजादी दिलाई। गांधीजी ने ग्रामीण और शहरी स्वच्छता के लिए हर घर में शौचालय की वकालत की और खुले में शौच का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने स्वच्छता को एक “रचनात्मक कार्यक्रम” के रूप में बढ़ावा दिया और माना कि इसे कानूनों से ज्यादा, लोगों की आदतों में शामिल होना चाहिए।
युवा शक्ति के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने कहा कि गोडसे ने हार मांस के शरीर को मारा गांधी जी को नहीं मारा उनका विचार आज भी जिंदा है। गांधी जी के विचारों को अपना कर राष्ट्र को आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि करो या मरो बस इस बात का ध्यान रखें की आंदोलन गुप्त या हिंसात्मक ना हो…आप लोगों में से प्रत्येक व्यक्ति को अब से खुद को स्वतंत्र व्यक्ति समझना चाहिए और इस प्रकार कार्य करना कि मानो आप स्वतंत्र हो…मैं स्वतंत्रता से कम किसी भी वस्तु से संतुष्ट नहीं होऊंगा।’
महात्मा गांधी ने विश्व की शांति, अहिंसा व सद्भाव का मार्ग दिखाया। 30 जनवरी का दिन प्रत्येक भारतीय के लिए किसी काले अध्याय से कम नहीं है। यही वह दिन था जब साबरमती के संत ने हे राम कहकर दुनिया को अलविदा कह दिया था। प्रत्येक वर्ष बापू की पुण्यतिथि को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन उनके आदर्शों को याद किया जाता है, जब मां भारती के इस महान सपूत ने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। बापू के आदर्श एक समृद्ध व करुणामय समाज का निर्माण करने के लिए प्रेरित करते हैं।
अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नारा लगाया कि गाँधी तेरे अरमानों को मंजिल तक पहुंचाएंगे। महात्मा गांधी अमर रहे आदि नारा लगाते हुए कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की गई।

नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक

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