
श्रद्धांजलि से संकल्प तक: राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव के नेतृत्व में कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह संपन्न…
श्रद्धांजलि से संकल्प तक: राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव के नेतृत्व में कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह संपन्न…
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/आज 24 जनवरी 2026 को पूर्व एमएलसी प्रत्याशी सह राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव के नेतृत्व में कृष्णापुरी बलुआही स्थित जिला राष्ट्रीय जनता दल कार्यालय में जननायक कर्पुरी ठाकुर की 102 वीं जयंती धूमधाम से मनायी गई।
सर्वप्रथम पूर्व विधायक डॉ संजीव कुमार,राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव, जिला उपाध्यक्ष कैलाशचंद्र यादव,प्रमोद यादव,युवा जिलाध्यक्ष उदय यादव,शिक्षक प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष डॉ संजय कुमार माँझी सहित सैकड़ों राजद नेताओं ने नेताओं ने जननायक कर्पुरी ठाकुर के तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर एवं माल्यर्पण कर उन्हें नमन किया और राजद कार्यालय से एन एच 31 ,एमजी मार्ग होते हुए जे एन के टी इंटर विद्यालय स्थित जनायक कर्पूर ठाकुर के प्रतिमा पर माल्यर्पण किया।
जननायक कर्पुरी ठाकुर के जयंती कार्यक्रम को अध्यक्षता राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने किया और संचालन जिला प्रधान महासचिव नंदलाला मंडल ने किया।
पूर्व एमएलसी प्रत्याशी सह राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने कहा कि ऐसे सामाजिक न्याय के मसीहा की 102 वीं जन्मजयंती मना रहे हैं। उन्होंने पिछड़े वर्गों को आरक्षण देकर सदियों की सामाजिक विषमता को दूर करने का ऐतिहासिक कार्य किया। यह निर्णय उनकी दूरदर्शिता और साहस का प्रतीक है। वे एक ऐसे राष्ट्रीय नेता थे, जिन्होंने जाति, धर्म, वर्ग से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग के लिए काम किया। उनकी नीतियां आज भी देश के लिए मार्गदर्शक हैं।बिहार की राजनीति में कर्पूरी ठाकुर का पद बहुत बड़ा माना जाता था। वह अपने दौर में अति पिछड़ा वर्ग के सबसे नेताओं में से एक थे। वह न सिर्फ बेबाक और प्रशासनिक के अलावा ओजस्वी वक्ता भी थे। उनके वैसे तो कई रोचक किस्से हैं लेकिन एक बार आजादी की लड़ाई के दौरान वो अपने एक भाषण के चलते चर्चा में आ गए थे। पटना में छात्रों की सभा में बोलते हुए उन्होंने क्रांतिकारी भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर हम सब मिलकर थूकें भी तो अंग्रेज बह जाएंगे। इस भाषण पर उन्हें दंडित भी किया गया था।पूर्व विधायक डॉ संजीव कुमार ने कहा कि गरीब लोग भी पढ़ सके इसके लिए कर्पूरी जी ने शिक्षा मंत्री बनते 8वीं तक की शिक्षा मुफ्त की, उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया, 5 एकड़ पर मालगुजारी खत्म की
कर्पूरी ठाकुर ने कहा था- जिस देश की बड़ी आबादी गरीबी में जी रही हो, वहां सांसदों-विधायकों को पेंशन देना वाजिब नहीं है। पूर्व वार्ड पार्षद सह जिला मीडिया प्रभारी रणवीर कुमार, प्रखंड अध्यक्ष सुनील चौरसिया ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर के गांव पितौझिया में एक शिक्षक थे जो स्वर्ण जाति से आते थे .राजा गुरु जी सिर्फ सवर्ण जाति के लड़कों को पढ़ते थे।कर्पूरी ठाकुर ने उनसे पढ़ने का अनुरोध किया राजा गुरु जी सामाजिक दबाव के चलते पढ़ा नहीं सकते थे लेकिन उन्होंने बीच का रास्ता निकालाऔर कहा कि जहां मैं पढ़ता हूं वहां तुम खलिहान में आ जाना और पुआल में बैठकर चुपचाप सुनना. मैं जोर-जोर से बोलूंगा.इससे तुम्हारी पढ़ाई भी पूरे हो जाएगी।कर्पूरी ठाकुर ने इसी तरीके से बचपन में पढ़ाई पूरी की।
बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बिनोद कुमार, जिला प्रवक्ता अजीत सरकार, प्रदेश उपाध्यक्ष सुबोध यादव,जिला उपाध्यक्ष कुमारी बेबी रानी,महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष रंजू सहनी ने कहा कि भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर जी ने एक ऐसी विशिष्ट छाप देश में सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाकर की, कठिन और चुनौतीपूर्ण वातावरण में उन्होंने कॉलेज की शिक्षा प्राप्त की। बड़ा चुनौतीपूर्ण वातावरण था, अपने जीवन में जिस व्यक्ति ने कभी कोई संपत्ति नहीं बनाई, पूरा जीवन जनता के लिए समर्पित रहा वह विधानसभा चुनाव कभी नहीं हारे, उनको कीर्तिमान प्राप्त है कि बिहार जैसे राज्य में वे पहले मुख्यमंत्री बने। एक बार उप-मुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री। उन्होंने अपना जीवन उनके लिए समर्पित किया जो समाज के हाशिये पर थे, जिनका कोई ध्यान नहीं दे रहा था। आज अति प्रसन्नता है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उनकी नीतियों का अनुसरण कर रहे हैं, उनके सपनों को साकार कर रहे हैं।
पंचायतीराज प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष राजकिशोर राज, ने कहा कि याद कीजिए वो ज़माना कितना चुनौतीपूर्ण था 1978 में सत्ता में आने के बाद क्या उनकी सोच थी सामाजिक न्याय के बारे में, उन्होंने आरक्षण लागू किया, किसी की परवाह नहीं की। यह एक नया अध्याय लिखा। उन्होंने अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किया, सरकारी कामकाज में हिन्दी को बढ़ावा दिया अब हमें लग रहा है वो कितने दूरदर्शी थे। वो वर्तमान की सोच के थे और भविष्य के भी। वो पहले मुख्यमंत्री थे देश में जिन्होंने शिक्षा पर ध्यान दिया, वो पहले मुख्यमंत्री थे देश में जिन्होंने मेट्रिक तक पढ़ाई मुफ़्त की– यह घोषणा बहुत महत्वपूर्ण थी। शिक्षा ही वह माध्यम है जो समाज को बदल सकता है, समाज में समानता ला सकता है और समाज की विषमताओं को खत्म कर सकता है।
नगर निकाय प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष विजय यादव,जिला महासचिव सह वार्ड पार्षद पप्पू यादव,सकदीप यादव कर्पूरी ठाकुर बिहार के 11वें मुख्यमंत्री बने थे। वह राज्य के दो बार मुख्यमंत्री बने। उन्होंने एक बार बिहार के डिप्टी सीएम का पद भी संभाला। लोकनायक जयप्रकाशनारायण और समाजवादी चिंतक राम मनोहर लोहिया उनके राजनीतक गुरु थे। कर्पूरी ठाकुर की कोशिशों के बदौलत बिहार में पिछड़ा वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरी में आरक्षण की व्यवस्था 1977 में शुरू हुई। 1952 को पहली बार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कर्पूरी ठाकुर ने बिहार के राज्य चुनाव में कभी हार नही देखी।
जयंती कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला महासचिव रामनरायम राम, मानसी प्रखंड अध्यक्ष तेजनारायण यादव,बेलदौर प्रखंड अध्यक्ष अरुण यादव,गोगरी प्रखंड अध्यक्ष शशि पासवान,चौथम कार्यकारी प्रखंड अध्यक्ष मो०जफर, राजद नेता विजय यादव,मनोज तांती,अखिलेश दास, सन्नी चंद्रवंशी, जितेंद्र कुमार ,आमिर खान सहित सैकड़ों राजद नेता मौजूद थे।
नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
*




