
खगड़िया में नेत्र उपचार का विश्वसनीय केंद्र बन रहा ‘मिथिला आई हॉस्पिटल’…आधुनिक तकनीक से मिल रही नई रोशनी- विकाश झा
खगड़िया में नेत्र उपचार का विश्वसनीय केंद्र बन रहा ‘मिथिला आई हॉस्पिटल’…आधुनिक तकनीक से मिल रही नई रोशनी- विकाश झा
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ जिले में तेजी से उभरता मिथिला आई हॉस्पिटल अब आम लोगों के लिए नेत्र उपचार का भरोसेमंद केंद्र बन गया है। अत्याधुनिक मशीनें, विशेषज्ञ चिकित्सक और सटीक चिकित्सा व्यवस्था के कारण यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
हॉस्पिटल प्रबंधक श्री विकास झा ने बताया कि अस्पताल में बिहार के कुशल एवं अनुभवी चिकित्सकों की टीम लगातार सेवा दे रही है। इनमें डॉ. नवीन कुमार, डॉ. शिल्पी सिंह, डॉ. कौशल मिश्रा सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं, जो मोतियाबिंद, रेटिना, ग्लूकोमा, कॉर्निया समेत सभी नेत्र रोगों का सफलतापूर्वक इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनों से जांच और ऑपरेशन किए जाते हैं, जिससे मरीजों को बड़े शहरों जैसी सुविधा खगड़िया में ही मिल रही है। कई जटिल मामलों में सफल उपचार के बाद मरीजों का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है।
मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए बड़ी राहत : डायबिटीज के मरीजों को अक्सर आशंका रहती है कि उनका मोतियाबिंद या अन्य नेत्र रोगों का ऑपरेशन सफल नहीं होगा, लेकिन मिथिला आई हॉस्पिटल में ऐसे मरीजों की आंखों का भी पूरी सफलता के साथ ऑपरेशन किया जा रहा है। मधुमेह के वे मरीज जिनका इसी कारण मोतियाबिंद ऑपरेशन संभव नहीं हो पाता, उनका भी यहाँ सफल ऑपरेशन किया जाता है।
प्रबंधक श्री झा ने बताया कि अत्याधुनिक फेको मशीन विधि से मरीजों का ऑपरेशन कर उन्हें उसी दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। जरूरतमंद मरीजों को आंखों में लेंस लगाकर तुरंत रोशनी वापस मिल रही है।
आयुष्मान योजना से सूचीबद्ध, मरीजों को बड़ी राहत
मालूम हो कि मिथिला आई हॉस्पिटल अब आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) से सूचीबद्ध हो चुका है। इससे खगड़िया और आसपास के हजारों लाभार्थी मरीजों को राहत मिल रही है।
अब आयुष्मान कार्डधारक मरीज यहां नेत्र रोगों की कई महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले गंभीर नेत्र समस्याओं पर उन्हें बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब आधुनिक सुविधाएं घर के पास उपलब्ध होने से समय और आर्थिक बोझ दोनों की बचत हो रही है। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि जल्द ही और नई तकनीकों व सेवाओं को शामिल कर उपचार व्यवस्था को और भी मजबूत बनाया जाएगा।
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