
श्याम लाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज का मामला: ED छापेमारी पर इंजीनियर धर्मेंद्र की प्रेसवार्ता… कार्रवाई को बताया दुर्भाग्यपूर्ण…निरीक्षण और न्यायालयीय प्रक्रियाओं का रखा पूरा ब्यौरा …
श्याम लाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज का मामला: ED छापेमारी पर इंजीनियर धर्मेंद्र की प्रेसवार्ता… कार्रवाई को बताया दुर्भाग्यपूर्ण…निरीक्षण और न्यायालयीय प्रक्रियाओं का रखा पूरा ब्यौरा …
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज में हुई ED की छापेमारी को लेकर आज कॉलेज परिसर में बीजेपी नेता इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, मीडिया प्रवक्ता अमरीश कुमार एवं समाजिक कार्यकर्ता प्रफुल्ल चंद्र घोष ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता आयोजित की । प्रेसवार्ता कर पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि गुरुवार को सुबह 10 बजे से लेकर रात्रि 3 बजे तक ED की टीम परिसर में जांच करती रही।वक्ताओं ने कहा कि बीते गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा किया गया छापेमारी अभियान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हम भारत के संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का पूर्ण सम्मान करते हैं, लेकिन यह समझ से परे है कि आखिर किस आधार पर यह छापेमारी की गई। यह अबूझ पहेली है। निरीक्षण, मान्यता और न्यायालय के आदेशों का पूरा क्रम स्पष्ट किया प्रवक्ताओं ने बताया कि 28 जून 2024 को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कॉलेज का निरीक्षण किया था और मान्यता प्रदान नहीं की थी। इसके बाद यह मामला माननीय पटना उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां माननीय न्यायाधीश ने 20 दिनों के भीतर पुनः निरीक्षण कर मान्यता पर निर्णय लेने का आदेश दिया। बताया जाता है कि NMC ने इस आदेश को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन इसी बीच कमीशन ने 24 जून 2025 को औचक निरीक्षण कर लिया। इस निरीक्षण में कॉलेज में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं पाई गई। इंजीनियर धर्मेंद्र ने बताया कि उसी समय CBI रायपुर ने एक प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें न तो कॉलेज को अभियुक्त बनाया गया, न कोई नोटिस जारी किया गया। केवल इतना दर्ज था कि “NMC के कुछ अज्ञात लोग उनसे संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि कमीशन 3 दिनों के भीतर मान्यता के संबंध में निर्णय जारी करे। लेकिन कमीशन ने CBI के प्राथमिक दर्ज का हवाला देते हुए मान्यता प्रक्रिया रोक दी। फिर मामला दोबारा सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा, जहाँ कोर्ट ने कहा—
व्यक्ति गुनाहगार हो सकता है, संस्थान नहीं। कोर्ट ने आयोग का आदेश रद्द करते हुए कहा कि 24 जून 2025 की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर 4 दिन के भीतर पुनः निरीक्षण और 20 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। कमीशन ने निर्णय न देते हुए 25 दिनों का समय मांगा, और 21वें दिन तीसरी बार औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में भी कोई कमी नहीं मिली।इसी आधार पर कॉलेज को 50 MBBS सीटों की मान्यता दी गई, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने बढ़ाकर 100 सीट कर दिया। CBI की चार्जशीट में भी कॉलेज का नाम नहीं — फिर ED की छापेमारी क्यों? इंजीनियर धर्मेंद्र ने बताया कि CBI द्वारा जमा की गई चार्जशीट में भी कॉलेज का नाम नहीं है और न ही कॉलेज के किसी व्यक्ति को नोटिस मिला है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब न निरीक्षण रिपोर्ट में कमी, न CBI चार्जशीट में नाम—तो ED की छापेमारी का कारण क्या? इंजीनियर धर्मेंद्र ने कहा कि CBI का खगड़िया में स्वागत है, परंतु यह ध्यान देने योग्य है कि एक सप्ताह पूर्व जम्मू-कश्मीर में संस्थान के निदेशक डॉ. विवेकानंद ने संस्थान को वैभव के शिखर पर पहुंचाने का संकल्प लिया था। उसके तुरंत बाद हुई यह छापेमारी उनके मनोबल को तोड़ने की साजिश भी हो सकती है। धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि
मैं और मेरा परिवार पूरी दृढ़ता से संकल्पित हैं। विरोधी चाहे जो कहें, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। यह अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जन-सहयोग से बना है और खगड़िया जिले की महान उपलब्धि है। इस राह की बाधाएं स्वयं दूर हो जाएंगी।
इंजीनियर धर्मेंद्र ने इस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण और अविश्वसनीय वजहों पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेज और उनके परिवार पर बैंक का करोड़ों रुपये का कर्ज है और फिर भी वे पूरी ईमानदारी से मेडिकल कॉलेज को खड़ा करने और चलाने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि हम वित्तीय अनियमितता कर ही नहीं सकते, क्योंकि हर कदम पर बैंकों का सख्त ऑडिट और निगरानी रहती है। संस्थान पारदर्शिता की मजबूत नींव पर खड़ा है।
परिवार की निजी संपत्तियाँ भी दांव पर—ससुराल की जमीन तक मॉर्गेज की है : धर्मेंद्र कुमार ने खुलासा किया कि संस्थान को खड़ा करने के लिए उन्होंने और परिवार ने व्यक्तिगत स्तर पर भारी आर्थिक त्याग किया है।
उन्होंने कहा कि मैंने अपने ससुराल की जमीन तक मॉर्गेज करवाई है। हमसे ज्यादा ईमानदारी से काम करने वाला दूसरा कोई नहीं होगा।प्रेसवार्ता में धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि संस्थान सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि 2030 तक खगड़िया को विकसित जिले की श्रेणी में लाने के संकल्प के साथ काम कर रहा है।
मेरे बड़े भाई व संस्थान के निदेशक डॉ. विवेकानंद ने अपनी पूरी जिंदगी इस संस्थान को खड़ा करने में लगा दी। आज भी वे हर चुनौती से लड़ने को तैयार हैं और हम सब परिवार, कॉलेज और जिले के विकास के लिए एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार के नए अवसर देकर खगड़िया को आने वाले वर्षों में बिहार के प्रमुख जिलों में लाना चाहते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि मैं, मेरा परिवार और पूरा संस्थान जनसहयोग से बना है। हम किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे। खगड़िया की जनता हमारे साथ है, और इसी शक्ति से सभी बाधाएं दूर होती जाएंगी।
नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
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