अंतिम इच्छा का सम्मान: पुत्र ने विधिसम्मत प्रक्रिया से किया माँ का देहदान… श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज को सौंपा पार्थिव शरीर…माता कांति देवी का देहदान समाज के लिए प्रेरणादायक है— डॉ. विवेकानंद

अंतिम इच्छा का सम्मान: पुत्र ने विधिसम्मत प्रक्रिया से किया माँ का देहदान… श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज को सौंपा पार्थिव शरीर...माता कांति देवी का देहदान समाज के लिए प्रेरणादायक है— डॉ. विवेकानंद

खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ जिले में देहदान का एक सराहनीय और कानूनी रूप से महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जहां पंजाब राज्य के पटियाला जिला अंतर्गत पात्रा निवासी ओमप्रकाश ने अपनी माता कांति देवी के निधन उपरांत उनकी पूर्व व्यक्त अंतिम इच्छा के अनुरूप उनका पार्थिव शरीर खगड़िया स्थित श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत दान किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांति देवी ने अपने जीवनकाल में ही स्पष्ट रूप से यह इच्छा व्यक्त की थी कि मृत्यु के उपरांत उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के कार्य में उपयोग हो। भारतीय कानून के तहत, विशेषकर मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 (संशोधित) तथा राज्य स्तर पर लागू देहदान संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार, मृतक की स्वेच्छा या निकटतम परिजन की सहमति से देहदान वैध है।
बताया गया कि इस निर्णय को लेकर परिवार एवं सगे-संबंधियों द्वारा प्रारंभिक आपत्ति जताई गई, किन्तु मृतका की स्पष्ट इच्छा एवं पुत्र की सहमति के आधार पर देहदान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, जो विधिक दृष्टि से वैध है।
पार्थिव शरीर को विधिवत एम्बुलेंस के माध्यम से खगड़िया लाया गया, जहां मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा आवश्यक दस्तावेजों की जांच के उपरांत दान स्वीकार किया गया। इस दौरान मेडिकल डायरेक्टर डॉ. ज्ञान भूषण, चेयरमैन डॉ. विवेकानंद, प्रबंधक डॉ. रीना कुमारी रूबी सहित अन्य चिकित्सक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ विवेकानंद ने कहा कि माता कांति देवी के इस महान त्याग और सेवा भाव से हम सभी भाव-विभोर हैं। उनका यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा और समाज दोनों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। ऐसे देहदान से मेडिकल छात्रों को सीखने का अवसर मिलता है और भविष्य में बेहतर चिकित्सक तैयार होते हैं। मैं दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ तथा उनके परिवार, विशेषकर उनके पुत्र का आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया।”
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बताया कि देहदान चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों एवं संस्थागत नियमों के अनुरूप संपन्न कराई गई।
इस घटना को सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल मृतक की अंतिम इच्छा का सम्मान है, बल्कि समाज में अंग एवं देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला कदम भी है।

नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक

 

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