
बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान से खगड़िया में जागरूकता की नई लहर, 2.32 लाख लोग जुड़े
‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान से खगड़िया में जागरूकता की नई लहर…2.32 लाख लोग जुड़े…
खगड़िया/ कौशी एक्सप्रेस/ भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चलाए जा रहे 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत खगड़िया जिले में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में तटवासी समाज न्यास के प्रतिनिधियों ने कहा कि जिले में लोगों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह भरोसा मजबूत हुआ है कि बाल विवाह मुक्त खगड़िया और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य जल्द ही हासिल किया जा सकता है।

तटवासी समाज न्यास, जो बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए कार्यरत 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के राष्ट्रीय नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है, ने इस अभियान का संचालन किया। जिले में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजेश वर्मा तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव चंदन कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
अभियान के दौरान 30 दिनों में रथ ने जिले में लगभग 2080 किलोमीटर की यात्रा की और 50 गांवों तक पहुंचकर करीब 2 लाख 32 हजार लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया। इसके अलावा जिले के 26 स्कूलों में 10,800 बच्चों व शिक्षकों को अभियान से जोड़ा गया, जबकि 28 धार्मिक स्थलों पर जाकर 115 धर्मगुरुओं को बाल विवाह के खिलाफ संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 दिसंबर 2025 को देशभर में 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने देश के 439 जिलों में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकालकर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर पड़ने वाले दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी।
तटवासी समाज न्यास के निदेशक कन्हैया कुमार सिंह ने कहा कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि बदलाव का संदेश था जिसे लोगों ने खुले दिल से स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
अभियान को तीन चरणों में चलाया गया। पहले चरण में स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों, दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़ा गया और उनसे विवाह से पहले आयु की जांच करने तथा बाल विवाह से इनकार करने का अनुरोध किया गया। वहीं तीसरे चरण में पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा बैंड बाजा, घोड़ी और अन्य विवाह सेवाएं देने वालों को भी बाल विवाह में सहयोग नहीं करने की अपील की गई।
कार्यक्रम में लोगों को यह भी बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन है और कानून की नजर में यह दंडनीय अपराध है। अभियान के दौरान लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ भी दिलाई गई।
नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
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