
बिहार की पारंपरिक पहचान को संजोती ‘बिहारी चुनरी साड़ी’… मुजफ्फरपुर से देशभर में बिखेर रही लोक संस्कृति की चमक…
बिहार की पारंपरिक पहचान को संजोती ‘बिहारी चुनरी साड़ी’… मुजफ्फरपुर से देशभर में बिखेर रही लोक संस्कृति की चमक…
मुजफ्फरपुर/ कौशी एक्सप्रेस/ बिहार की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक वस्त्रों की पहचान को नई ऊँचाई देने का कार्य ‘बिहारी चुनरी साड़ी’ कर रही है। मुजफ्फरपुर (बिहार) से संचालित यह प्रतिष्ठान बिहार की पारंपरिक चुनरी, साड़ी और लोक-डिज़ाइन को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप प्रस्तुत कर रहा है। ‘बिहारी ट्रेडिशन’ की थीम पर आधारित इस ब्रांड का उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए उसे देश-विदेश तक पहुँचाना है। बिहारी चुनरी साड़ी, स्थानीय कारीगरों की कला, पारंपरिक रंगों और शुद्ध डिज़ाइनों को प्राथमिकता देती है।
यहाँ उपलब्ध साड़ियाँ विवाह, पूजा-पर्व, छठ, तीज-त्योहारों के साथ-साथ दैनिक उपयोग और विशेष अवसरों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। ब्रांड की खासियत यह है कि हर डिज़ाइन में बिहार की लोकपरंपरा, नारी सौंदर्य और सांस्कृतिक प्रतीकों की झलक दिखाई देती है।

इस प्रतिष्ठान का संचालन कविता सिन्हा द्वारा किया जा रहा है, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी ‘बिहारी चुनरी साड़ी’ तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ग्राहक फेसबुक और इंस्टाग्राम पर @biharichunrisaree18 के जरिए नए कलेक्शन, ऑफ़र्स और डिज़ाइनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
ग्राहकों की सुविधा के लिए कस्टमर केयर नंबर 8434677277 और 7004061208 उपलब्ध हैं, जहां से ऑर्डर और जानकारी ली जा सकती है। गुणवत्ता, भरोसा और परंपरा—इन तीन स्तंभों पर खड़ा ‘बिहारी चुनरी साड़ी’ आज बिहार की सांस्कृतिक पहचान को नई पहचान दिलाने में जुटा है। वहीं डिस्ट्रीब्यूशन हेड अरविंद कुमार पप्पू ने बताया कि बिहारी चुनरी साड़ी का उद्देश्य केवल व्यापार नहीं, बल्कि बिहार की पारंपरिक चुनरी और साड़ी को देश-विदेश तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि कंपनी की मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था के कारण अब कम समय में ही उत्पाद ग्राहकों तक पहुँचाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय बुनकरों और कारीगरों के साथ सीधे जुड़कर कार्य किया जा रहा है, जिससे उन्हें उचित मूल्य के साथ निरंतर रोजगार मिल रहा है। आने वाले समय में बिहार के अन्य जिलों के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी बिहारी चुनरी साड़ी का नेटवर्क विस्तार किया जाएगा, ताकि बिहार की लोकसंस्कृति और पारंपरिक वस्त्रों को व्यापक पहचान मिल सके।
नोट- प्रसारित समाचार की जिम्मेवारी प्रेस की नहीं है तथा विज्ञापनों की प्रामाणिकता से प्रेस का कोई सबंध नहीं है – संपादक
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